मंगलवार, 26 जनवरी 2016

इन्द्रधनुष खिलने को है ......



आज मेरी पलकों के तले 
ये जो मद्धिम सी नमी है 
तुम्हारे सपनों की किरचें 
खुली आँखों में खनकती हैं 
शायद इन चमकते रंगों से 
तुमने  दोस्ती कर ली है 
पर इन रंगों की ये चमक 
मेरी आँखों में बसती है 
जब भी मेरी आँखों में 
यादों की नमी छलकती है 
बावरा मन सोचता है 
हाँ !  अब यहीं कहीं तो 
इन्द्रधनुष खिलने को है  .........  निवेदिता 





2 टिप्‍पणियां:

  1. नमी और प्रकाश, अब इन्द्रधनुष खिल ही जाये।

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  2. इंद्रधनुष की रचना करती सुंदर कविता ।

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