शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

खामोश से शब्द .....

तुम अक्सर गुनगुनाते हो
मेरे मन में
खामोश से शब्द बोलते हैं ,
सुनना चाहोगी
मैंने भी इक नामालूम सी
खामोशी से कहा
हाँ ! मैं सुन रही हूँ
तभी तो खामोशियाँ
गुनगुनाती गाती हैं
अब बस इतना ही
सुनिश्चित कर लेना
खामोश से शब्द
तभी बोलना
जब मैं रहूँ वहीँ कहीं
ख़ामोशी को संजो लेने
अपने उर में  ....  निवेदिता


8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर......कोमल सी कविता !

    अनु

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (21-11-2015) को "काँटें बिखरे हैं कानन में" (चर्चा-अंक 2168) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, हिन्दी फिल्मों के प्रेरणादायक संवाद - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. मनोरम

    http://ulatpalat.blogspot.in/2015/11/blog-post_27.html

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