रविवार, 10 अगस्त 2014

सबसे अलग हो तुम ......

सबसे अलग हो तुम 
जानते हो क्यों 
सब देखते हैं 
लबों पर थिरकती हँसीं 
स्वर में बोलते अट्टहास 
पर तुम ....
तुम तो देख लेते हो 
इन सबसे परे 
मेरी आँखों में तैरती नमी ....... निवेदिता 

10 टिप्‍पणियां:

  1. मर्म को छूती हई पंक्तियाँ ...

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (11-08-2014) को "प्यार का बन्धन: रक्षाबन्धन" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1702 पर भी होगी।
    --
    भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक
    पावन रक्षाबन्धन पर्व की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. नो नमी फॉर टुडे!! कीप स्माइलिंग माई सिस!!

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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