गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

पूजा के कलश में प्रयुक्त वस्तुओं का महत्व


कलश :
कलश के विशिष्ट आकार के कारण उसके अंदर रिक्त स्थान में एक विशिष्ट सूक्ष्म नाद होता  है । इस सूक्ष्म नाद के कम्पन से ब्रम्हांड का शिव तत्व कलश की तरफ आकृष्ट होता है । 
समुद्र मंथन के  समय विष्णु भगवान ने अमृत कलश धारण किया था । इसलिए एक मान्यता ये भी है कि कलश में सभी देवताओं का वास होता है । अत: पूजा में सबसे पहले कलश की स्थापना कर के देवताओं का आवाहन किया जाता है 

पानी 
कलश में पानी भर कर रखा जाता है । पानी को सर्वाधिक शुद्ध तत्व माना जाता है । संभवत: इसीलिये ये मान्यता भी है कि उसमें ईश्वरीय तत्व को आकृष्ट करने की क्षमता सर्वाधिक होती है । 

नारियल 
कलश पर नारियल रखने से उसकी शिखा में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है ,जो कलश के जल में प्रवाहित होती है । इस प्रक्रिया में कलश में  जल में तरंगे एक नियमित लय में उठती हैं । 

पंचरत्न :
पंचरत्नों में देवताओं के सगुण तत्व ग्रहण करने की क्षमता होती है । कलश के जल में पंचरत्न रखना त्याग का भी प्रतीक माना जाता है । 

सप्तनदियों का जल : 
गंगा ,गोदावरी ,यमुना ,सिंधु ,सरस्वती ,कावेरी और नर्मदा - अधिकांश ऋषियों ने इन नदियों के तट पर ही देवताओं के तत्वों को प्राप्त करने के लिए तपस्या की थी । सांकेतिक रूप में उनके तप के प्रभाव से शुद्ध हुयी नदियों के जल को हम देवताओं के अभिषेक स्वरूप कलश में रखते हैं । सप्तनदियों का जल न मिलने पर गंगा जल रखा जाता है ।

सुपारी और पान :
पान की बेल ,जिसको नागबेल भी कहते हैं , को भूलोक और ब्रम्ह्लोक को जोड़ने वाली कड़ी माना जाता है । इस में अवस्थित सात्विकता के फलस्वरूप इसमें भूमि तरंगों और ब्रम्ह तरंगों को आकृष्ट करने की क्षमता होती है । कलश के जल में सुपारी डालने से उठने वाली तरंगे देवता के सगुण तत्व को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाती हैं ।

तुलसी - दल :
तुलसी में वातावरण को शुद्ध करने की क्षमता सर्वाधिक होती है । तुलसी अपनी सात्विकता से जल के साथ देवता के तत्व को भी वातावरण में प्रेषित करती है ।

हल्दी - कुमकुम :
हल्दी जमीन की नीचे उगती है इसलिए उसमें भूमि तरंगों का प्रभाव बहुत अधिक होता है । कुमकुम हल्दी से ही बनती है ।

आम के पत्ते :
कलश में सभी सामग्री रखने के बाद आम के पांच अथवा सात पत्तों से ढंका जाता है । ऐसी मान्यता है कि देवता के आवाहन से कलश में उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा आम की डंठल के द्वारा ग्रहण की जाती है ।               ....  निवेदिता

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (25-04-2014) को I"चल रास्ते बदल लें " (चर्चा मंच-1593) में अद्यतन लिंक पर भी है!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. हर वस्तु का अपना सार्थक स्थान है ....अच्छी पोस्ट

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन कितने बदल गए हम - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. पूजा में हर वस्तु का वैज्ञानिक महत्व भी होता है...जानकारी भरी पोस्ट!!

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  5. इन तमाम चीज़ों को अपने आसपास होते तो देखते हैं पर इनकी उपयोगिता के विषय में नहीं पता था। जानकारी भरी प्रस्तुति।।।

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  6. बहुत ही उपयोगी व नई जानकारी । वास्तव में बहुत से ऐसे क्रियाकलाप होते हैं जिन्हें हम अनजाने ही करते रहते हैं । स्तुति-स्तोत्र आदि के विषय में भी यही बात है । इस उपयोगी जानकारी के लिये आपका धन्यवाद ।

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  7. उपयोगी और विस्तृत जानकारी ... अनजाने कि कितना कुछ करते अहिं पर उसका महत्त्व नहीं जानते ...

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