शनिवार, 9 मार्च 2013

एक कदम आगे चलो न ......

एक कदम आगे चलो न ...........
ये अनुरोध था या आदेश समझ ही नही पायी ,बस इन शब्दों को ही गुनती रह गयी और मुदित हो उठी :)
दरअसल ये और किसी ने नहीं अपितु हमारे बड़े बेटे "अनिमेष " ने दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर 
कहे थे । जब उसने भीड़ के एक बड़े से रेले को आते  और मेरी ख़रामा - ख़रामा अपने में मस्त चहलकदमी 
को देखा , तो चिंतित सा हो कर तुरंत मेरी बाँह थामी और बोला ,"मुझसे एक कदम आगे ,मेरे सामने चलो 
मैं तुमको देख सकूँ ऐसे ।" उस एक छोटे से पल में लगा जैसे मेरा छोटा सा बच्चा कितना बड़ा हो गया है 
और सच कहूँ तो लगा हमारे पापा अपनी सुरक्षा की छाँव में सहेजने को रूप बदल कर वापस आ गये है ! 
पूरी यात्रा में ऐसे कई लम्हे आये । ऊपर की शायिका पर मुझे चढ़ाने के लिये विश्वास से भरा हुआ अपना कंधा आगे कर के मेरा हाथ थाम लिया था उसने और मै नि:संशय हो ऊपर जा कर सो गयी । 

ये एक ऐसा लम्हा था ,जिसकी राह सम्भवत: हर माँ देखती है । घर से निकलने के पहले अनिमेष मेरी गोद में दुबका हुआ एक नन्हा सा शिशु ही लग रहा था । मैं मन ही मन सोच रही थी कि मेरा बच्चा बड़ा कब होगा । अभी तो घर के पास ही कानपुर में है , कोई भी जरूरत पड़ने पर हम तुरंत उसके पास पहुँच जाते थे । 
पर अब तो ज़िन्दगी की राहें घर से कुछ अलग और अनजानी राहों पर ले जायेंगी और वहाँ हर दिन उस को नयी चुनौतियों का सामना करना होगा । उन परिस्थितियों में वो क्या करेगा ,यही सोचती अशांत हो जाती थी । वैसे भी बच्चे कितने भी बड़े हो जाएँ माँ को वो बहुत छोटे ही लगते हैं । 

ईश्वर भी सृजन करते हैं एक माँ की तरह ,सम्भवत: इसीलिये उन्होंने ऐसी परिस्थिति ला कर मेरे डावाँडोल 
होते मन को इतनी सुखद अनुभूति देते हुए दृढ कर दिया । लगता है ज़िन्दगी की संशय भरी प्रखर ताप भरी दुपहरी पर स्नेहिल छाँव की बदली लहरा रही हो और मीठे - मीठे लम्हे ओस की तरह मेरे कमलमन को अभिसिंचित कर रहे हों !!!

25 टिप्‍पणियां:

  1. बच्चे हमारा ही प्रतिबिम्ब होते हैं, उन्हें देखकर उनके व्यव्हार और आदतों से हम पूरे परिवार को जान समझ सकते हैं, आपके दिए संस्कार हैं बेटे में...आपने बोया सींचा संवारा है इसे. अब देखिये कितने सुन्दर फूलों से सुशोभित हो महक उठा है खुशबू से...महाशिवरात्रि की शुभकामनायें....

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (10-03-2013) के चर्चा मंच 1179 पर भी होगी. सूचनार्थ

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    1. चर्चा - मंच में सम्मिलित करने के लिए आभार !

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    महाशिवरात्रि की शुभकामनाएँ...!

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  4. कहाँ कुछ बदला है, पहले भी आँखों के सामने चाहते हैं बच्चे, और आज भी।

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  5. बेटे के लिए माँ से प्यारा कोई नहीं ...

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  6. जिन्हें हम बच्चे कहते हैं, दरअसल वे बहुत ‘बड़े‘ होते हैं। हम उनका जितना ध्यान रखते हैं, कई बार उससे कहीं अधिक वे हमारा ध्यान रखते हैं।

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  7. कोमल भाव भरी अभिव्यक्ति

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  8. बढ़िया प्रस्तुति-
    शुभकामनायें -
    हर हर बम बम

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  9. कोमल भाव सुंदर प्रस्तुति.

    शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  10. महा शिव रात्रि मंगल मय हो

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  11. बच्चे कब बडे हो जाते हैं पता ही नही चलता ………बहुत सुन्दर ... महाशिवरात्रि की शुभकामनायें

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  12. बहुत सुन्दर लिखा है आपने .....माँ और बेटे का सम्बन्ध ही ऐसा है ....एक अटूट विश्वास से भरा ....वो जहाँ भी जाए आपके संस्कार और संबल साथ ही होंगे जो जीवन में सदा उसकी रक्षा करेंगे .....

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  13. maa-bete ka sambandh sabse anmol...:)

    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  14. दिनांक 11/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  15. महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ...सुन्दर

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  16. बहुत सार्थक प्रस्तुति आपकी अगली पोस्ट का भी हमें इंतजार रहेगा महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

    कृपया आप मेरे ब्लाग कभी अनुसरण करे

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  17. अब क्या कहें ...आपने तो हमारे ही मन के भाव लिख दिए हैं :)

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  18. सुन्दर संस्मरण। बच्चे के सुन्दर भविष्य के लिये मंगलकामनायें।

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  19. माँ की बच्चों के प्रति कोमल भावनाओं का सुन्दर चित्रण ....
    मैं तो अपने बच्चों को देख सोचती हूँ कब मेरे बच्चे कब बड़े होंगें .....

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  20. सार्थक और सुंदर .
    आप भी पधारो स्वागत है ...
    http://pankajkrsah.blogspot.com

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  21. दो तीन साल पहले पापा-मम्मी के साथ बहार खाना खाने गया था, खाने के बाद वेटर बिल मेरे पास दे गया. इतनी ख़ुशी हुई थी उस वक़्त जिसे बता नहीं सकता हूँ.

    यह आपके इस लेख का एक दूसरा पक्ष है. :-)

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