शनिवार, 2 जनवरी 2021

#बोलो_क्या_क्या_खरीदोगे


बचपन में घर में काका को अक्सर गुनगुनाते सुना था ,"बड़ भाग मानुस तन पायो ,माया में ही गंवायो " ... कई बार पूछने और उनके समझाने पर भी ,मेरे बालमन को यह मायामोह का गोरखधंधा कुछ समझ नहीं आया था । उसके बाद ज़िन्दगी के मायाजाल ने क्रमशः मुझे भी अपनी माया में उलझा लिया और कब बचपन के खेल खिलौने के स्थान पर कॉपी - किताब आ गए ,और फिर ज़िन्दगी के झिलमिलाते हुए अन्य सोपान जैसे इस विचार से ही मन को दूर करते गए । आज इतने लम्बे सफ़र के बाद अनजाने में ही ,मैं भी यही भजन गुनगुनाने लगी हूँ ।


जीवन के अब तक के सफ़र में दोस्त भी मिले ,उम्मीद भरते हुए ख़्वाब भी देखे ... सेहत के प्रति ध्यान भी तभी गया जब उसने कहीं स्पीडब्रेकर तो कभी माइलस्टोन दिखा कर चेताया । एक तरह से सिर्फ एक पहले से पूर्वनिर्धारित ढांचे में ही रंग भरते गए बिना यह सोचे कि हम चाहते क्या हैं या हममें क्या करने की काबिलियत है ! ईश्वर ने अपनी प्रत्येक कृति को कुछ विशेष करने के लिये ही बनाया होता है ,जिसके बारे में कुछ सोचने या जानने का प्रयास किए बिना ही , पहले से तैयार रास्ते पर चलने की जल्दी में जीवन ख़तम कर इस दुनिया से चल देते हैं । 


बहरहाल यह सोचने के स्थान पर कि हम क्या कर सकते थे और क्या नहीं किया ... और यह भी नहीं सोचूंगी कि जीवन कितना बचा है या उसकी उपयोगिता क्या है ... अब बस सिर्फ वही करना चाहूँगी जिसमें मेरे मन को सुकून मिल रहा हो 😊


#ऐसे_दोस्त चाहूँगी जो खीर में नमक पड़ जाने पर भी उसके स्वाद में अपनी सकारात्मकता से नया स्वाद भर सकें और यह देख कर कि मैं किसी प्रकार चल पा रही हूँ ,दौड़ नहीं सकती की लाचारी के स्थान पर ,यह कहने का जज़्बा रखते हों कि अपने दम पर चल रही हो ,किसी पर निर्भर नहीं हो । मेरे लिये पहले भी और अब भी दोस्त का मतलब ही होता है एक ऐसी शख़्सियत जिसके पास मेरे लिये #वक़्त हो ,उसके दिल - दिमाग़ में #मुहब्बत हो ... ज़िन्दगी कितने भी उबड़ खाबड़ रास्तों पर चल रही हो ,वह एक #उम्मीद की रौशन किरण हो ... दावत पर आमंत्रित कर के दूसरी सुबह सैर पर ले जाना न भूले कि #सेहत न बिगड़े । लब्बोलुआब यह है कि मेरी कमी / दुर्बलता को अपनी सकारात्मकता से सुधार सके और सँवार भी दे । ( यह पंक्ति भी एक मित्र के इस कथन को न समझ पाने पर लिखी है 😄)


मैं ऐसे दोस्त को खोजने के लिये परिवार के बाहर जाऊँ यह जरूरी भी नहीं 😅 यह फोन पर भी आवाज़ भाँप लेने वाले अपने बच्चों में भी मिलता है ,तो कभी सुबह की चाय बनाने का अनकहा सा आलस चेहरे पर भाँप लेने वाले हमसफ़र में मिल जाता है  ...#शुक्रिया_ज़िन्दगी ...  निवेदिता श्रीवास्तव 'निवी'

2 टिप्‍पणियां:


  1. जय मां हाटेशवरी.......

    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    03/01/2021 रविवार को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में. .....
    सादर आमंत्रित है......


    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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