गुरुवार, 12 जुलाई 2018

शिकायत थी जिंदगी से ......

शिकायत थी जिंदगी से
कभी कोई हमनवां नहीं मिलता .... 

आज सोचती हूँ ( तो )
समझती हूँ कि मिलता है ,
और अक्सर ही मिलता है .... 

बस कभी उनको तो
कभी हमको समझ नही आता ....
दोनों समझ सकें बस
वो लम्हा नहीं मिलता ..... निवेदिता

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (14-07-2018) को "सहमे हुए कपोत" (चर्चा अंक-3032) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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