शनिवार, 31 अगस्त 2013

क्यों आते हो .......




एक दिन 
दिल ने लचक कर 
आँसुओं  से कहा 
क्यों आते हो …… 
आँखें भी 
थक गईं हैं 
तुम्हे ……… 
हाँ तुम्हे 
स्थान देते - देते 
सब तस्वीरें 
धुंधला गईं 
यादों की टीस 
सहते -सहते !
 
ये शिकवे 
सुन - सुन कर 
आँसुओं ने भी 
थक कर 
घर नया 
तलाश लिया  
आँखों में तो
रेत सी रूखी 
खुश्की 
आ ही गयी  
मगर दिल  ……
क्यों इतना  
नम औ भारी सा 
हो गया  ……
                   -- निवेदिता