एक दिन
दिल ने लचक कर
आँसुओं से कहा
क्यों आते हो ……
आँखें भी
थक गईं हैं
तुम्हे ………
हाँ तुम्हे
स्थान देते - देते
सब तस्वीरें
धुंधला गईं
यादों की टीस
सहते -सहते !
ये शिकवे
सुन - सुन कर
आँसुओं ने भी
थक कर
घर नया
तलाश लिया
आँखों में तो
रेत सी रूखी
खुश्की
आ ही गयी
मगर दिल ……
क्यों इतना
नम औ भारी सा
हो गया ……
-- निवेदिता

