बच्चों के जन्मदिन पर मैं हमेशा ही यादों की मनमोहक वीथियों में भटक जाती हूँ ,और पता नहीं कितनी बातें - यादें तरोताज़ा हो जाती हैं । आज भी तस्वीरों की तलाश में ये तस्वीर मिल गयी और इससे जुड़ी हुई उनकी शरारत भी दुलरा गयी। उपहार अकसर गिफ्ट - बॉक्स में ही दिया जाता है ,अपने दोनों बच्चों की ये तस्वीर मुझे यही याद दिलाती है और साथ ही ये याद आता है कि कैसे इन दोनों ने सामान आते ही फटाफट सब निकाल के इधर उधर फेंक दिया था और उस डिब्बे में दोनों घुस के बैठ गये थे और पावडर के नये डिब्बे से पावडर की बरसात भी की थी :)
आज हमारे बड़े बेटे "अनिमेष "का जन्मदिवस है :)
ईश्वर के वरदान की तरह ही मिला है अनिमेष हमें । एकदम मस्तराम - मनमौजी , अपनी ही धुन में मग्न , पर संवेदनशील भी बहुत ही ज्यादा है । सबकी मदद के लिए भी हमेशा तैयार । मुझसे तो वैसे भी इन दोनों की टेलीपैथी बहुत जबरदस्त है । जब भी कभी मैं थोड़ा सा भी विचलित होती हूँ या पीड़ा में होती हूँ उसी पल इन में से किसी का फोन आ जाता है और मैं जैसे एनर्जी ड्रिंक लेकर फिर से तरोताजा हो जाती हूँ । आज ही जब मुझे M.R.I. के लिए जाना था ,तो एक अजीब सी उलझन थी …….… मन कर रहा था कि वहां से भाग आऊँ पर अचानक ही दोनों बच्चों के चेहरे नजरों के सामने तैर गये और शक्लें आँखों में बसाए पूरी प्रक्रिया से कब गुजर गयी पता ही नहीं चला और जैसे ही बाहर आयी अनिमेष की फोन कॉल भी अचानक ही आ गयी ………
अनिमेष की मासूम सी शरारतों की वजह से ही उसका नम्बर मेरे फोन में " नॉटी " के नाम से सुरक्षित है , कब वो दुलार में "नाटू " से होते हुए "नट्टू " तक पहुँचेगा ,ये तो उसकी उस समय की उसकी कान्हा - लीला पर निर्भर करता है :)
पहले घर ,फिर I.I.T. कानपुर और अब X.L.R.I. जमशेदपुर में अनिमेष को देखती हूँ तो बस एक गीत याद आता है ……
इस कान्हा से कम नटखट नहीं है मेरा कान्हा :) जितनी भी दुआएँ हो सकती हैं आज के दिन ही क्यों अपनी हर श्वांस में मेरे "नट्टू" को ……
-निवेदिता


