पञ्च तत्व से तन बना , रखे इसे संभाल ।
पंछी इक दिन उड़ चला , छोड़ सभी जंजाल।।
साँस साँस की बात है, साँस लगे अनमोल।
राम नाम की साँस ले, साँसें करें कमाल।।
सत्य शील अरु नेह को, कौन सका है तौल।
लोभ लालसा मोह का, छाया मायाजाल।।
शब्दों के ही जाल ले, छलते मीठे बोल
पछताना बेकार अब, खड़ा सामने काल।।
कर्मों से ही सब सधे, कर्मों से हों दूर।
भेड़चाल में चल पड़े, कैसे हों खुशहाल।।
गुरुघंटालों से बचें , ज्ञान दृगों के खोल।
बने सहारा डाल जो , मत काटो वो डाल।।
सागर की लहरों सदृश , जीवन बड़ा अबूझ।
प्रभु की माया समझ ले, भ्रम को 'निवी' निकाल।।
निवेदिता श्रीवास्तव 'निवी'
लखनऊ

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