गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

बस यूँ ही


प्यार ! कैसा है ये प्यार 
क्या जरूरी है इसके लिए 
सोलह साल का अल्हड़पन 
आती - जाती ऋतुओं से 
थामना बसंती पुरवाई को 
झिझकती ठिठकती तिथियाँ 
चुन लेना बस एक तिथि को 
कभी शमा रौशन करना  
कभी नम सी साँसें और ..
प्यार ! इसको नहीं चाहिए 
न कोई दिन , नही कोई लम्हा
नहीं रखता ख़्वाबों में भी तन्हा  
इसके लिए चाहिए सिर्फ 
धड़कनों में आती जाती बस 
चंद साँसें .........
             -निवेदिता 


21 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम को शब्द देना कहाँ सरल है..... सुंदर भाव

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  2. सुंदर और सार्थक भी ...!!
    शुभकामनायें ...

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  3. सच में प्यार किसी विशेष उम्र, ऋतु या तिथी का मोहताज नहीं है । सुन्दर अभिव्यक्ति ।

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  4. प्यार तो प्यार है इसे कोई नाम ना दो :)

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (16-02-2013) के चर्चा मंच-1157 (बिना किसी को ख़बर किये) पर भी होगी!
    --
    कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि चर्चा में स्थान पाने वाले ब्लॉगर्स को मैं सूचना क्यों भेजता हूँ कि उनकी प्रविष्टि की चर्चा चर्चा मंच पर है। लेकिन तभी अन्तर्मन से आवाज आती है कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ वह सही कर रहा हूँ। क्योंकि इसका एक कारण तो यह है कि इससे लिंक सत्यापित हो जाते हैं और दूसरा कारण यह है कि किसी पत्रिका या साइट पर यदि किसी का लिंक लिया जाता है उसको सूचित करना व्यवस्थापक का कर्तव्य होता है।
    सादर...!
    बसन्त पञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
    सूचनार्थ!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. बसन्त पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ!


    दिनांक 16 /02/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  7. प्यार दिवाना होता है मस्ताना होता....है, हर खुशी से हर ग़म से बेगाना होता है ....:)

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  8. pyaar ka koi din samy nahi hota..sundar prastuti..

    http://kahanikahani27.blogspot.in/

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  9. प्यार करना, प्यार निभाना और प्यार को संजोना अपने आप में के बहुत प्यारी बात है | आपकी रचना पढ़कर अच्छा लगा | आभार |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  10. प्रेम में आँख बन्द कर जगत भूल जाने के बाद तो सब ईश्वरीय ही तो हो जाता है।

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