रविवार, 10 अप्रैल 2016

ये हँसी .......



कभी कभी 
ये हँसी 
उमगती है 
किलकती है 
बस एक 
झीनी सी
ओट दे जाने को
और आँसुओं को
ख़ुशी के जतलाने को
और हाँ
ये आँसू भी तो
बेसबब नही
इनसे ही तो
बढ़ जाता
नमक जिंदगी में ...... निवेदिता