शनिवार, 2 अप्रैल 2011

क्यों आते हो .......

आंसुओं से कहा 
क्यों आते हो ....
आँखें भी थक चुकी हैं ;
तुम्हे स्थान देते-देते ,
सब तस्वीरें धुंधला गयी 
यादों की टीस सहते-सहते ,
ये शिकवे सुन-सुन 
आंसुओं ने भी थक कर ,
नया घर खोज लिया है  ,
आँखों में तो रेत सी 
खुश्की आ गयी है ,
दिल मगर इतना क्यों 
नम औ भारी सा हो गया .......
                  -निवेदिता