झरोख़ा

"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।

रविवार, 21 नवंबर 2021

खुशियों की हुई बरसात !

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 प्यार भरी हुई इक बात खुशियों की हुई बरसात ! नन्हा सा इक फूल खिला झोंका खुशबू भरा मिला सज गयी मेरे घर की डाली प्रभु बन कर आये माली दु...
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निवेदिता श्रीवास्तव
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