झरोख़ा

"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

निष्कंटक अविरल बहिये!

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 धवल नवल बहती धारा सी  निष्कंटक अविरल बहिये! हँस रही तू पलकें मींचे, सिसक रहा क्यों तेरा मन। खिलती मुस्कानों के नीचे, पीड़ा नाचे ओढ़ वसन। हृदय...
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सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

नगरी प्यारी राम की ... जय सियाराम 🙏

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 #जय_सियाराम 🙏 नगरी प्यारी राम की, बहती सरयू धार। नगर अयोध्या आ गए , करने को उपकार।। राम-राम के बोल में, रमता है संसार। माया से तू दूर हो, ...
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शनिवार, 20 सितंबर 2025

रुसवाई न होती ...

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 उम्र झूठ की तुमने बताई न होती । वफ़ा की यूँ कभी रुसवाई न होती ।। सूरज भी झुलसा होगा तन्हाई में  अंधेरा सोया रहा मन की गहराई में । चाँद ने चा...
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शुक्रवार, 19 सितंबर 2025

जीवन घट अबूझ पिया ...

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 जीवन घट अबूझ पिया  बाट तके बिरही मनवा। राह निहारे बिरहन जिया पतझड़ जीवन बिन पिया रे! अगम अबूझ ढुलक चली है शुष्क नयनों की प्यास छली है। अम्बर...
बुधवार, 10 सितंबर 2025

विदाई : एक चाहत

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  विदाई विदाई शब्द से ही, दो लम्हे अनायास ही दस्तक देने लगते हैं ... एक तो बेटी की विदाई और दूसरी इस दुनिया से, परन्तु जब चित्त सुस्थिर हो क...
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निवेदिता श्रीवास्तव
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