झरोख़ा

"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।

शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

सीप सा होना चाहती हूँ ......

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सीप यूँ तो अक्सर ही   मोती सहेजे रखती है  अपने दामन में बरबस  उसकी चमक संजोये  अनजानी उम्मीदें जगा  इंद्रधनुषी रंग सजा...
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