झरोख़ा

"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।

शनिवार, 11 दिसंबर 2021

हाइकु : अहान

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 याद आ गई अल्हड़ अठखेली शिशु की बोली ! मेरा जहान मिठास भरी शान प्यारा अहान ! खिला विहान हँस पड़ा जहान मिला अहान ! तीसरी पीढ़ी खुशियों की हो सीढ़...
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निवेदिता श्रीवास्तव
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