झरोख़ा

"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।

गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

लघुकथा : धैर्य की दिशा

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लघुकथा : धैर्य की दिशा स्टेज पर अवि पुरस्कार लेता हुआ और दर्शक दीर्घा में अंकू के साथ मैं । तालियों की गड़गड़ाहट में खुशियों में झूमता...
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