झरोख़ा

"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।

मंगलवार, 27 मई 2014

पुण्य सलिला की तलाश में ......

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गंगा जल  सदैव गंगा की  लहरों  में ही नहीं मिलता  पर हाँ ! कभी कभी  जल पात्र  या कह लो  गंगाजली में भी रहता है  पर ......
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निवेदिता श्रीवास्तव
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