झरोख़ा

"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

बस इक पल को ........

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पल - पल राह तकी जिस पल की  वो पल भी आया बस इक पल को  पलक - पलक गैल बुहारी जिस साए की  वो साया भी आया कुछ ठोकर खाया सा  जर्रा -जर्रा सहेज ...
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