झरोख़ा

"आंखों" के झरोखों से बाहर की दुनिया और "मन" के झरोखे से अपने अंदर की दुनिया देखती हूँ। बस और कुछ नहीं ।

बुधवार, 30 नवंबर 2011

याद न जाये बीते दिनों की ........

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           " यादें " इस रूप में ईश्वर ने हम सब को बहुत बड़ी दुआ दी है | अगर अपने जीवन से यादों को हटा दें तो सम्भवत: ज़िन्दगी जीने...
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निवेदिता श्रीवास्तव
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